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आगे वाली सीट पर बैठी लड़की


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desi kahani

मेरा नाम संजीव है और मैं मुंबई का रहने वाला हूं, मैं कंपनी में नौकरी करता हूं और मैं अक्सर अपने काम के सिलसिले में बाहर रहता हूं। मैं जब भी अपने ऑफिस जाता तो मैं बस से ही जाना पसंद करता था क्योंकि मैं जहां पर काम करता हूं, वह मेरे घर से काफी दूर है इसलिए मैं बस में जाना ही पसंद करता था। मैं सुबह जल्दी तैयार हो जाता और बस से ही ऑफिस जाता था। मैं सुबह बस से ऑफिस जाता हूं तो उसमें जो लोग हमेशा ही अपने काम से जाने वाले थे, वह लोग मुझे अच्छे से पहचाने लगे क्योंकि मेरा अक्सर ही उस रूट पर जाना होता था और उस बस में जितने भी व्यक्ति हमेशा जाने वाले रहते थे वह मुझे पहचानते थे और मुझसे बात कर लिया करते थे। एक दिन मेरी आगे वाली सीट पर एक लड़की बैठी हुई थी। वह बहुत ही ज्यादा सुंदर थी और मैं उसे ही देखे जा रहा था।

जब वह मेरे आगे बैठी थी तो मैं उसके बालों को देख रहा था क्योंकि उसके बाल बहुत ही ज्यादा लंबे थे और वह एकदम सीधे थे। कभी-कभार वह पीछे मुड़कर देखती थी, जब वह पीछे मुड़ती तो मैं उसे देख लेता। मैं ठीक उसके पीछे बैठा हुआ था। उसे देख कर मैं बहुत खुश होता था। मेरे अंदर उससे बात करने की इच्छा जगती रहती थी। क्योंकि मैं उसका नाम पता करना चाहता था कि उसका नाम क्या है परंतु मैं उसे जनता तक नही था और वह अगले स्टेशन में ही उतर गई। जब वह अगले स्टेशन में उतरी तो मैं उसे देखे जा रहा था और वह चली गयी। इतने बड़े शहर में वह शायद ही मुझे उसके बाद मिलती। मैंने अपने दिमाग से उसका ख्याल भी निकाल दिया था और मैं अपने काम पर ही लगा हुआ था। मुझे अपने काम के सिलसिले में मुंबई से बाहर जाना था। मुझे कुछ दिनों के लिए झारखंड में जाना था, वहां पर मेरा काफी लंबा प्रोजेक्ट चलने वाला था इसलिए मैं अपना प्रोजेक्ट पूरा करके वापस जाना चाहता था और मैं चाहता था कि जितना जल्दी हो सके मैं घर लौट जाऊं क्योंकि मेरा मन वहां बिल्कुल भी नहीं लग रहा था। मैं अपने घर वालों को बहुत मिस कर रहा था, मेरे घर वाले मुझसे पूछा करते कि तुम खाना तो समय पर खा रहे हो, मैं उन्हें बताता की यहां पर कंपनी की सारी फैसिलिटी दी गई है, मुझे खाने का भी दिया गया है जिसकी वजह से मुझे खाने में कोई भी समस्या नहीं होती है।

मेरी मां बिल्कुल ही निश्चिंत हो चुकी थी और वह मुझे फोन करती थी तो वह  मुझसे पूछते थे कि तुम वापस कब लौट रहे हो, मैं उन्हें हमेशा ही कहता कि मुझे कुछ समय लग जाएगा क्योंकि अभी मेरा प्रोजेक्ट खत्म नहीं हुआ है, मैं भी चाहता हूं कि जल्दी से जल्दी मेरा प्रोजेक्ट खत्म हो जाए जिससे कि मैं भी अपने घर लौट पाऊँ। मैंने भी सोच लिया था कि जल्दी से जल्दी मैं काम खत्म कर लेता हूं उसके बाद मैं तुरंत ही मुंबई लौट जाऊंगा। जब मेरा प्रोजेक्ट पूरा हो गया तो उसके कुछ समय बाद ही मैं मुंबई चला गया। जब मैं मुंबई गया तो मेरे ऑफिस मे मेरे बॉस बहुत ही खुश थे और कहने लगे कि तुमने बहुत ही अच्छे से काम करवाया है। उन्होंने मुझे कुछ पैसे भी दिए और कहने लगे कि यह पैसे मैं तुम्हारे बोनस के रूप में तुम्हें दे रहा हूं। मैं उन्हें कहने लगा कि आपको तो पता ही है मैं कितनी मेहनत करता हूं। मेरे बॉस को मेरे बारे में अच्छे से मालूम था कि मैं कितना ईमानदार और कितना ज्यादा मेहनती हूं इसी वजह से हम दोनों के बीच में काम को लेकर काफी चर्चाएं हो जाया करती थी। वह मुझ पर सबसे ज्यादा भरोसा करते थे। ऑफिस में वह किसी से भी ज्यादा बात नहीं करते थे और जब भी उन्हें कुछ काम होता तो वह सबसे पहले मुझे ही बुलाते थे। मेरी हमेशा की तरह ही वही जिंदगी चल रही थी, सुबह ऑफिस के लिए घर से निकलता था और शाम को ऑफिस से घर के लिए वापस आता था। मेरी यही दिनचर्या चल रही थी और मैं सोचने लगा कि यदि मैं इसी प्रकार से काम करता रहा तो मेरी बहुत ही ज्यादा तरक्की होगी। इसलिए मैं अपने आप को बिजी रखने की कोशिश करता था और कुछ ना कुछ नई चीज मैं अपने जीवन में करता रहता था। मेरे पिताजी एक सरकारी नौकरी पर है। वह हमेशा ही मुझे समझाते रहते हैं और मेरी मां का व्यवहार भी बहुत अच्छा है, वह भी हमेशा मुझे बहुत अच्छे से समझाती हैं। मेरी शुरुआत से ही बहुत कम दोस्ती रही इसलिए मैं ज्यादा किसी के भी संपर्क में नहीं हूं।

मैं हमेशा की तरह ही सुबह ऑफिस के लिए घर से निकला था। एक दिन बस स्टॉप पर बस आई तो मैं उसमें बैठ गया और फिर बस कुछ ही आगे पर रुकी तो वह लड़की भी बस में आकर बैठ गई और इत्तेफाक से वह लड़की मेरे बगल में ही बैठ गई। जब वह मेरे बगल में बैठी तो मैं काफी देर तक सोचता रहा कि मुझे उससे बात करनी चाहिए की नही, वह कहीं मुझे गलत ना समझ ले इसलिए मैंने उससे बात नहीं की लेकिन मैं उससे बात करना ही चाहता था। जब मैंने उस लड़की से उसका नाम पूछा तो वो कहने लगी कि मेरा नाम राधिका है। राधिका से जब मैं बात कर रहा था तो उससे बात करके मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। मैंने जब राधिका से पूछा कि तुम क्या करती हो तो वो कहने लगी कि मैं कंपनी में जॉब करती हूं और उसी कंपनी में मुझे जॉब करते हुए काफी समय हो चुका है। उसने भी मुझसे मेरी जानकारी ली और मैंने भी उसे बताया कि मैं भी एक कंपनी में नौकरी करता हूं, मुझे काम करते हुए काफी समय हो चुका है। मैं राधिका से बहुत ही अच्छे से बात कर रहा था। मुझे उससे बात कर के बहुत अच्छा लग रहा था और मैं उसे ध्यान से देखे जा रहा था। वह भी मेरी तरह मुझे बडे ही ध्यान से देख रही थी। मैंने राधिका का नंबर ले लिया और वह मेरे ऑफिस से पहले ही उतर गई।

जब वह मेरे ऑफिस से पहले उतरी तो मैंने उससे बात करने के बहाने से उसे पूछा कि क्या यह आपका ही नंबर है, वह कहने लगी कि यह मेरा ही नंबर है। उसके बाद से राधिका और मेरी अक्सर बात हो जाया करती थी और हम लोग घूमने भी जाया करते थे। वह जब भी ऑफिस से घर लौटती थी तो मैं उसे मिल ही जाता था और हम दोनों साथ में ही अब आया करते थे। जब हम दोनों साथ में आते थे तो राधिका भी मुझसे बहुत खुलकर बात करने लगी। वह 1 दिन मुझसे कहने लगी कि यदि आपकी नजर में कहीं कोई जॉब हो तो मुझे बता देना। जब उसने यह बात कही तो मैंने उसे कहा कि तुम मुझे अपना रिज्यूम दे देना मैं तुम्हारी जॉब लगवा दूंगा। राधिका ने मुझे अपना रिज्यूम दिया और मैंने उसके लिए अपनी कंपनी में बात की। राधिका का मेरी कम्पनी में जब सलेक्शन हुआ तो वह बहुत ही खुश हुई और मुझे कहने लगी कि आपने मेरी जॉब लगा दी है मैं बहुत ही खुश हूं। अब हम दोनों के बीच बहुत ज्यादा नजदीकियां बढ़ने लगी थी और राधिका भी मुझे पसंद करने लगी। जब हम दोनों का लंच होता तो हम दोनों हमारे ऑफिस की कैंटीन में ही बैठा करते थे और एक दूसरे के बारे में बात करते रहते थे। मुझे उससे बात करना बहुत ही अच्छा लगता था और उसके साथ समय बिताना मुझे बहुत अच्छा लगता था। हम दोनों के बीच में बहुत सारी बातें होती रहती थी और हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत ज्यादा ओपन विचारों के साथ बात किया करते थे मुझे बिल्कुल भी शर्म नहीं होती जब मैं राधिका से बात किया करता था। हमारे ऑफिस मे मेरे और राधिका के बीच सेक्स को लेकर बात हो रही थी वह मुझे कहने लगी क्या आपने कभी सेक्स किया है। मैंने उसे कहा कि हां मैंने तो बहुत बार सेक्स किया है। राधिका मुझसे कहने लगी कि मैंने आज तक कभी भी सेक्स नहीं किया है मैंने उसे कहा चलो मैं तुम्हारे साथ सेक्स करता हूं। मैं उसे ऑफिस की गैलरी में ले गया और मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसके मुंह के अंदर डाल दिया जैसे ही मेरा लंड उसके मुंह में गया तो उसने अपने मुंह के अंदर तक मेरे लंड को उतारते हुए चूसने लगी।

वह बहुत अच्छे से मेरे लंड को सकिंग कर रही थी मुझे भी बहुत आनंद आ रहा था जब वह मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर करती जाती। काफी देर ऐसा करने के बाद मैंने उसके कपड़े उतारते हुए उसके स्तनों का रसपान करना शुरू कर दिया उसके स्तन बहुत ही नरम और मुलायम थे इसलिए मैंने उन्हें बहुत देर तक चूसा। उसके बाद मैंने उसकी योनि को चाटते हुए गीला कर दिया मैंने अपने लंड को उसकी योनि के अंदर जैसे ही डाला तो बहुत चिल्लाने लगी मैंने उसे बड़ी तीव्र गति से धक्के मारना शुरू कर दिया। मैंने उसे इतनी तेजी से  झटके दिए कि उसका पूरा शरीर हिलने लगा और वह मेरा पूरा साथ देने लगी। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था जब मैं उसे झटके मार रहा था मेरा लंड उसकी योनि के अंदर तक गया हुआ था और मैं उसे बड़ी बड़ी तेजी से चोद रहा था। मैंने काफी देर तक उसे झटके दिए। उसके बाद मैंने उसे घोड़ी बना दिया जब मैंने उसे घोड़ी बनाया तो उसकी योनि से खून टपक रहा था मैंने उसकी योनि के अंदर अपने लंड को जैसे ही डाला तो वह उछल पड़ी मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और मेरा लंड उसकी योनि के पूरे अंदर तक चला गया। मैंने उसे इतनी तेजी से धक्के मारे उसका पूरा शरीर गर्म होने लगा मुझसे भी उसकी योनि की गर्मी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हो रही थी और मैंने उसे बड़ी तेज झटके मारे लेकिन उसकी योनि बहुत ज्यादा टाइट थी इसलिए मैं ज्यादा देर तक उसकी योनि की गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाया और मेरा माल गिर गया। मैंने अपने लंड को उसकी योनि से बाहर निकालते हुए उसकी योनि को साफ कर दिया। अब हम दोनों ऑफिस में चले गए उसके बाद से कई बार राधिका और मेरे बीच में सेक्स संबंध बन चुके हैं वह मेरे बिना बिल्कुल भी नहीं रह सकती।

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