Best Hindi sex stories

Sab se achi Indian Hindi sex kahaniya!

बॉयफ्रेंड से धोखे के बाद कॉल गर्ल बनना पड़ा


Click to Download this video!

antarvasna sex stories

मेरा नाम रचना है मैं जालंधर की रहने वाली हूं, मैं कंपनी में नौकरी करती हूं और मुझे वहां पर नौकरी करते हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है। मैं एक बहुत ही सीधी और सिंपल लड़की हूं, मुझे ना तो ज्यादा बन ठन कर रहना अच्छा लगता है और ना ही मैं और लड़कियों की तरह ब्यूटी पार्लर में जाती हूं। मैं बहुत ही सिंपल हूं इसी वजह से ना तो आज तक मैंने कभी किसी लड़की की तरफ देखा और ना ही मुझे किसी से भी ज्यादा बात करना अच्छा लगता है। मैं अपने आप में ही खोई रहती हूं और अपने आप से ही खुश हूं। मेरे पापा पुलिस में है और वह बहुत ही सख्त किस्म के व्यक्ति हैं। वह ज्यादा किसी से बात नहीं करते इसलिए हमारे घर का माहौल भी बहुत शांत रहता है।

वह जब भी घर पर होते हैं तो सब लोग चुपचाप बैठे रहते हैं,  मेरा बड़ा भाई उनसे बहुत ज्यादा डरता है और वह उनसे इतना ज्यादा रहता है कि वह उनसे बिल्कुल भी बात नहीं करता जबकि उसकी शादी हो चुकी है उसके बावजूद भी उसकी मेरे पिताजी के सामने बिल्कुल भी आवाज नहीं आती। मैं भी अपने पिताजी से ज्यादा बात नहीं करती और मुझे जो भी कुछ बात करनी होती है तो मैं अपनी मां से ही कहती हूं, वही मेरे पिताजी से कहती हैं। मैं अपना खर्चा खुद ही उठाती हूं क्योंकि मैं नौकरी करती हूं इसलिए मुझे जब भी पैसे मिलते हैं वह मैं अपने पास ही रख लेती हूं और कभी घर में किसी को जरूरत पड़ती है तो मैं वह पैसे उन्हें दे देती हूं। मेरी मम्मी मुझे बहुत अच्छा मानती है और वह हमेशा ही मेरा सपोर्ट करती हैं। मुझे भी उनके साथ में समय बिताना बहुत अच्छा लगता है इसलिए मैं जब भी घर पर होती हूं तो उनके साथ ही बैठकर मैं बातें करती हूं और वह भी मुझसे बहुत बात करती है। मैं उन्हें ही अपना सबसे अच्छा दोस्त मानती हूं। मेरे ऑफिस में भी मैं सब लोगों से सिर्फ काम के बारे में ही बात करती हूं और जब मैं घर आती हूं तो मेरा किसी से भी ज्यादा संपर्क नहीं रहता। मेरा उन लोगों से सिर्फ ऑफिस तक ही संपर्क रहता है लेकिन मेरे ऑफिस में एक लड़का है जो कि हमेशा ही मुझे देखता रहता है, उसका नाम अरुण है और उसने कुछ दिन पहले ही हमारा ऑफिस जॉइन किया है।

वह मुझे बहुत घूर कर देखता है लेकिन मैं फिर भी उसकी तरफ ध्यान नही देती और मैं सिर्फ अपने काम पर ही ध्यान देती हूं। मुझे लगता है की उसकी आदत ही शायद इस प्रकार की होगी लेकिन वह बहुत ही अच्छा लड़का है। जब मुझे उसके बारे में पता चला कि वह भी बहुत शरीफ और सीधा लड़का है, वह सिर्फ अपने काम से ही मतलब रखता है तो मैं उससे बातें करने लगी। जब वह मुझसे ऑफिस में बात करता था तो बहुत ही अच्छे तरीके से मुझसे बात किया करता था। मुझे लगता है कि आरुन से अच्छा व्यक्ति कोई भी नहीं है इसलिए मैं भी उससे बात करने लगी और धीरे-धीरे हम दोनों की बात काफी होने लगी इसलिए हम दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे। अब अरुण और मैं एक साथ घूमने के लिए जाते थे और जब भी मुझे समय मिलता तो मैं अरुण के साथ ही समय बिताना पसंद करती थी। अरुण को भी मेरे साथ समय बिताना बहुत अच्छा लगता है। मैंने एक दिन अरुण से कहा कि मैं तुमसे शादी करना चाहती हूं यदि तुम इस बारे में अपने घर में बात करो तो मुझे बहुत खुशी होगी। अरुण ने कहा कि कुछ समय बाद मैं अपने पिताजी से तुम्हारे बारे में बात कर लूंगा। उसने मुझसे कुछ समय मांगा। अरुण और मैं हमेशा ही घूमने जाते थे। मुझे अरुण पर पूरा भरोसा था और वह भी मुझसे बहुत ज्यादा प्रेम करता था परंतु मुझे नहीं पता था कि उसके दिल में क्या चल रहा है। एक दिन वह मुझे अपने माता पिता से मिलाने अपने घर ले गया, जब मैं उसके माता-पिता से मिली तो मैं बहुत खुश हुई और मुझे अब अरुण पर पूरा भरोसा हो चुका था कि वह मुझसे शादी करना चाहता है इसलिए मैं अरुण के साथ बहुत खुश थी और यह बात हमारे पूरे ऑफिस में मालूम थी कि हम दोनों के बीच में प्रेम संबंध है इसी वजह से हमारे ऑफिस में जितना भी स्टाफ है वह सब हमारे प्रेम संबंध के बारे में अच्छे से जानता है लेकिन मैं अपने घर पर बात नहीं कर पा रही थी क्योंकि मेरे पिताजी बहुत ही सख्त किस्म के व्यक्ति हैं और यदि उन्हें मेरे और अरुण के बारे में पता चलता तो कहीं वह गुस्सा ना हो जाये इस वजह से मुझे उन्हें बताने में बहुत डर लग रहा था लेकिन अरुण मुझसे कहने लगा कि तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो, यदि तुम बात नहीं कर सकती तो मैं अपने माता पिता को तुम्हारे घर पर भेज देता हूं।

मैंने उसे कहा कि नहीं मैं खुद ही अपने माता-पिता से बात करूंगी। मैन मम्मी से अरुण के बारे में बात की तो वह कहने लगी कि तुम्हारे पिताजी को बिल्कुल भी यह सब चीज पसंद नहीं है लेकिन मैंने अपनी मम्मी को मना लिया और मैं सोचने लगी कि मैं अपने पिता से इस बारे में कैसे बात करूंगी लेकिन मैंने हिम्मत करते हुए अपने पिताजी से भी अरुण के बारे में बात कर ली, मेरे पिताजी पहले बहुत ज्यादा गुस्सा हुए लेकिन फिर वह मान गए और कहने लगे कि तुम उसके माता पिता को मुझसे मिलवा देना। दूसरे दिन अरुण अपने माता पिता को मेरे घर पर ले आया, मेरे पिताजी उनसे मिलकर बहुत खुश हुए क्योंकि अरुण के पिताजी एक अच्छे पद पर हैं इसीलिए मैंने अपने पिताजी से हिम्मत करते हुए उनके बारे में बात कर ली और मेरे पिताजी भी इस रिश्ते से खुश थे और उन्होंने भी इस रिश्ते के लिए हामी भर ली। हम दोनों भी बहुत खुश थे और हम दोनों अब साथ में घूम सकते थे। एक दिन मैं ऑफिस से घर लौट रही थी और उस दिन अरुण ऑफिस नहीं आया था।

मैंने जब अरुण को फोन किया तो वह मुझे कह रहा था कि मेरी तबीयत खराब है इसलिए मैं आज ऑफिस नहीं आया। मैंने उसे कहा कि मैं तुम्हारे घर पर तुमसे मिलने आ जाती हूं तो उसने मुझे मना कर दिया और कहने लगा कि तुम बेकार में क्यों तकलीफ कर रही हो तुम ऑफिस का काम करो, मैं कुछ दिनों में ठीक हो जाऊंगा तो ऑफिस आ जाऊंगा लेकिन मैं जब घर के लिए जा रही थी तो मुझे अरुण के जैसा ही कोई लड़का दिखाई दिया, मुझे लगा शायद उससे मिलती जुलती शक्ल का कोई और होगा परंतु जब मैं उसके पास गई तो वह अरुण ही था। वह एक लड़की के साथ बैठ कर बात कर रहा था और उसने उसके हाथों में हाथ डाले हुए थे। वह दोनों बहुत हंस कर बात कर रहे थे और मुझे इस बात का बहुत ही बुरा लगा क्योंकि अरुण ने मुझसे झूठ कहा था और हम दोनों के रिश्ते की बात भी हो चुकी थी। मेरे पास घर मे देने के लिए कोई भी जवाब नहीं था इसीलिए मैंने सोचा कि मुझे अब कहीं चले जाना चाहिए। मेरे पास जो भी जमा पैसे थे मैं वह पैसे लेकर मुंबई चली गई। मुझे मुंबई के बारे में ज्यादा कुछ भी जानकारी नहीं थी लेकिन फिर भी मैं हिम्मत करते हुए मुंबई चली गई। मेरी मम्मी ने जब मुझे फोन किया तो मैंने उन्हें समझाया कि मैं कुछ समय के लिए यही पर रहना चाहती हूं और अरुण भी मुझे बहुत फोन कर रहा था लेकिन मैंने उसका फोन उसके बाद कभी भी नहीं उठाया, मैं अब मुंबई में ही अपनी जिंदगी गुजारने लगी। मैंने एक छोटी सी कंपनी में नौकरी करनी शुरू कर दी और मेरी दिनचर्या ऐसे ही निकलती जा रही थी लेकिन मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी में मैं अपनी इच्छाओं को पूरा नहीं कर पा रही थी और ना ही मुझे कुछ ऐसा मिल रहा था जिससे मैं ज्यादा पैसे कमा पाऊं या अपना अच्छा जीवन बिता पाऊँ। मेरे साथ में एक लड़की काम करती है वह बहुत पैसे कमाती है लेकिन वह सिर्फ दिखाने के लिए ही हमारे साथ में काम करती थी। मैंने उसे पूछा कि तुम क्या करती हो तो उसने मुझे बताया कि मैं एक एस्कॉर्ट एजेंसी में काम करती हूं वहा मुझे बहुत अच्छे पैसे मिल जाते हैं उसने मुझे वहां का नंबर दे दिया और जब मैं एजेंसी में गई तो उन्होंने मुझे एक लड़के के पास भेज दिया।

जब मै उस लड़के के पास गई तो उसकी उम्र 28 29 वर्ष की रही होगी। मुझे वह अपने साथ अपने फ्लैट में ले गया और जब मैं उसके फ्लैट में गई तो उसने अपनी पैंट को नीचे उतारते हुए अपने लंड को निकालते हुए मुझे कहा कि तुम मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो। मैंने कभी भी आज तक किसी का लंड अपने मुंह में नहीं लिया था इसलिए मुझे थोड़ा दिक्कत हो रही थी उसके लंड से बदबू भी आ रही थी। मैंने जब उसके लंड को अपने मुंह में लिया तो मुझसे पहले बिल्कुल भी नहीं हो पा रहा था लेकिन मैंने थोड़ी देर तक उसे अच्छे से चूसा तो मुझे उसके लंड को बहुत अच्छे से अपने मुंह के अंदर बाहर कर रही थी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मेरे स्तनों को चूसने लगा उसने बहुत देर तक मेरे स्तनों का रसपान किया उसके बाद उसने अपने लंड को मेरी योनि के अंदर डाल दिया जैसे ही उसका लंड मेरी योनि में गया तो मेरे मुंह से बहुत तेज आवाज निकल रही थी। उसने मेरे दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए मुझे झटके देना शुरू कर दिया उसने मुझे इतनी तीव्र गति से धक्के दिया कि मेरी चूतडे हिलने लगी काफी देर तक उसने मुझे ऐसे ही चोदा। उसके बाद उसने मुझे घोड़ी बना दिया मेरी योनि से खून निकल रहा था क्योंकि मैंने आज तक किसी से भी अपनी चूत नहीं मरवाई थी उसने मेरी चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो मैं चिल्लाने लगी और वह बड़ी तेजी से मुझे झटके दिए जा रहा था। उसका लंड जैसे ही मेरी योनि में जाता तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होता ऐसा उसने मेरे साथ आधे घंटे का किया और उसके बाद उसने मुझे पैसे दिए। रात को मैं उसे लड़के के साथ सोई थी रात भर उसने मुझे 5 6 बार चोदा होगा सुबह जब मैं अपने घर आई तो मेरी चूत मे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था।

Best Hindi sex stories © 2017
error:

Online porn video at mobile phone